उत्तरकाशी :गंगनाडी मेला एवं थान मंदिर कि पौराणिक कथा :पर विशेष खबर

उत्तरकाशी :गंगनाडी मेला एवं थान मंदिर कि पौराणिक कथा :पर विशेष खबर

गंगनानी कुण्ड -फोटो-सुनील थपलियाल
अमित डिमरी थान गाव (उत्तरकाशी )
बड़कोट यमुनोत्री मार्ग पर यमुना नदी के किनारे बसे एक छोटे से गॉव “गंगनाडी” में प्रतिवर्ष संक्रांति के दिन तीन दिन के मेले का आयोजन होता है ,यहाँ एक मंदिर है जिसके पास ही एक कुण्ड बना हुआ है, इस कुण्ड में गंगा का पानी है एवं कुण्ड में पायी जाने वाली मछलियाँ यमुना में पायी जाने वाली मछलियो से भिन्न हैं.यहाँ गंगा (भागीरथी) का पानी एक पत्थर द्वारा जमीन काटकर लाया गया है , यह पत्थर वही कुण्ड के पास में ही रखा गया है. मंदिर में गंगा एवं यमुना जी की मुर्तिया राखी गयी हैं.मेले में बहुत दूर दराज से बड़े श्रद्धा भाव से लोग आते हैं.
पौराणिक कथा के अनुसार थान गॉव में जमदग्नि ऋषि का आश्रम था जो की गंगनाडी से मात्र ३ कि.मी पर स्थित है,ऋषि वह अपनी पत्नी रेणुका के साथ रहते थे,ऋषि नित्य प्रातः पूजा करते थे जिसके लिए जल उनकी पत्नी बाड़ाहाट (उत्तरकाशी) से लाया करती थी, एक दिन रेणुका को जल लाने में देरी हुई जिससे ऋषि नाराज हुए और उन्होंने गंगा जी से प्रार्थना कि जिससे गंगा जी कि एक धारा गंगनानी  पहुंच गयी, ऋषि कि पत्नी रेणुका और  राजा सहस्त्रबाहु कि पत्नी वेणुका दोनों सगी बहने थी, एक बार राजा सहस्त्रबाहु ने बड़कोट में महायज्ञ किया इस यज्ञ में जमदग्नि ऋषि भी सपरिवार गए, यज्ञ समाप्त होने के बाद जब ऋषि वापस थानगाव  पहुंचे तो रेणुका ने उनसे वैसा ही यज्ञ करने को कहा ,फिर ऋषि ने यज्ञ करने के लिए राजा इंद्रदेव से कामधेनु गाय मांगी जो इंद्र ने सहर्ष दे दी,यज्ञ में राजा सहस्त्रबाहु भी आये ,यज्ञ समाप्त होने पर सहस्त्रबाहु ने ऋषि से कामधेनु गाय कि मांग कि किन्तु ऋषि ने देने से इंकार कर दिया, राजा ने इसे अपना अपमान समझा और क्रोधित होकर ऋषि का सर काट डाला, राजा जब कामधेनु गाय को खोलकर लेजाने लगे तो गाय आकाश में उड़ गयी, राजा ने गाय को मारने के लिए तीर छोड़ा वह तीर गाय के खुर को चीरता हुआ निकल गया ,कहते हैं तभी से गाय बैलो के खुर के दो हिस्से होते हैं ,
जब कैलाश पर्वत पर तपस्या कर रही जमदग्नि ऋषि के पुत्र परशुराम ने रेणुका के रोने कि आवाज सुनी तो तपस्या छोड़ कर थान आगये,अपने पिता के वध का सुनकर ,उसने बड़कोट जाकर सहस्त्रबाहु का सिर काट कर वही दबा दिया, रेणुका अपने पति के साथ थान गॉव में ही जलकर सती हो गयी थी, बाद में थान में इसी स्थान पर जमदग्नि ऋषि का मंदिर बनाया गया,और बड़कोट में आज भी सहस्त्रबाहु के किले को गढ़ के रूप में जाना जाता है
  • Ground0

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