उत्तरकाशी : पौधशाला का निरीक्षण करने उत्तरकाशी पहुंची केन्द्रीय मंत्री उमा भारती

उत्तरकाशी : पौधशाला का निरीक्षण करने उत्तरकाशी पहुंची केन्द्रीय मंत्री उमा भारती

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पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय केन्द्रीय मंत्री उमा भारती अपने दो दिवसीय जनपद भ्रमण पर पहले दिन आज धरासू स्थित वन विभाग के द्वारा तैयार की गई पौधशाला का निरीक्षण किया।

उन्होंने वन चौकी परिसर में एक रूद्राक्ष का पौध रोपित किया। वृक्षारोपण कार्यक्रम में उत्तराखण्ड सरकार के वित्त, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री प्रकाष पंत, सचिव पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय भारत सरकार परमेष्वरन अयर, संयुक्त सचिव सत्यव्रत साहू, महानिदेशक स्वच्छ भारत मिषन भारत सरकार अक्षय राउत, विधायक गंगोत्री गोपाल सिह रावत, जिलाधिकारी डा. आशीष चौहान ने भी पौध रोपण किया। केन्द्रीय मंत्री भारती ने कहा कि वन विभाग की ओर से नमामि गंगे परियोजना के तहत करीब 3 लाख 80 हजार पौध तैयार की गई है जिसमें से वर्श 2016-17 में करीब 1 लाख 75 हजार पौध रोपित की गई है। नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा के दोनों ओर बहृद पौध रोपण किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि गंगा की अविरल धारा बनायें रखने के लिए हर सभंव कार्य करने की आवष्यकता है। कहा कि नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत ही गंगोरी में मॉडल वाटिका तैयार की गई है।

उसके उपरान्त पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री ने वीरपुर डुण्डा में आयोजित कार्यक्रम में गंगा ग्राम बगोरी परियोजना के तहत ठोस एवं तरल अवष्श्टि प्रबन्धन योजना लागत 11 लाख 88 हजार का षिलान्यास किया। वहीं उन्होंने,स्वजल पायलेट परियोजना के अन्तर्गत 32 लाख 90 हजार की योजना का षिलान्यास किया, इस मौके पर स्वच्छ आइकानिक स्थानों में गंगोत्री का भी शुभारंभ किया। बता दें कि स्वच्छ आईकानिक में देष भर मेंं 100 स्थानों में से गंगोत्री का नाम शामिल है।

केन्द्रीय मंत्री भारती ने अपने संबोधन में कहा कि गंगा को संरक्षित रखने के लिए भारत सरकार ने गंगा मंत्रालय बनाया।

मंत्रालय के बनने के बाद नमामि गंगे परियोजना के तहत 20 हजार करोड़ की फंडिग हुई। इसके अन्तर्गत कई कार्य किए जाने है और कई कार्य गतिमान भी है इस प्रोजेक्ट के तहत गंदे नाले गंगा में न गिरे, सिवरेज प्लांट का ट्रिटमेंंट,वृक्षारोपण आदि कार्य किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि नमामि गंगे योजना के तहत समग्रता के साथ बनाई गई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य ओडिएफ हुआ है और गंगा के किनारे वाले राज्य, जिले, एवं गांव पूर्ण ओडिएफ हुए है। अब इन सभी गांव को ओडिएफ पल्स बनाना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में बर्फ एवं नदिया है फिर भी पीने के पानी की कमी है। महिलाएं अधिकतर अपनी षक्ति पीने के पानी लाने में खर्च करती है। इसका कारण यह है कि पहाड़ में नदी है तो बहुत गहराई में है और पानी के स्त्रोत है तो काफी दूर है। इसलिए पहाड़ की महिलाओं को अधिक सार्मथ्य लगता है। उन्होंने कहा कि इसके समाधान के लिए नल जल योजना, बिजली, सोलर,पाईप कनेक्षन, आदि योजनाएं लोगों तक पंहुचायी जा रही है।

उन्होंने कहा कि जब तक सामाजिक संस्थाएं एवं सामूहिक भागेदारी नहीं होगी तब तक कोई भी स्थाई समाधान नहीं निकाला जा सकता है । स्वजल योजना के क्रियान्वयन के लिए जनता की भागेदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत आंतकवाद, नकसलवाद, महावादी भ्रश्टाचार से लड़ सकता है। लेकिन अमीरी एवं गरीबी के बीच की खाई को नहीं पाटी जा सकती है। जो निरन्तर बड़ रही है। उन्होंने कहा कि देष भर में स्वजल योजना पांच राज्यों में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में षुरू की गई है, जिसका आज उत्तराखण्ड में भी शुभारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि षीघ्र ही 56 मेगा वाट की लखवाड़ व्यास परियोजना एवं किसाऊ परियोजना भी शुरू करने जा रहे है। उसके बाद केन्द्रीय मंत्री ने साडग गावं का निरीक्षण भी किया जहां स्वजल की ओर से पायलेट प्रोजेक्ट के तहत कार्य किए है।

इस मौके पर गांव  के महिला मंगल दल के लोगों ने केन्द्रीय मंत्री को मांग पत्र भी सौंपा। ग्रामीणों ने बताया कि गावं में गर्मी के दो माह पानी की किल्लत रहती और लिफ्ट योजना बनाने की मांग की। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक को विधायक निधि से करवाने को कहा।
इस अवसर पर वित्त एवं पेयजल मंत्री प्रकाश् पंत ने कहा कि गंगा गांव पायलेट प्रोजेक्ट के तहत मां गंगा का सम्पर्ण एवं पुर्नजिवित करने एवं गांव के लोगों को स्वालम्बी बनाने एवं उनके कर्तव्य का अनुपालन करने के लिए पूरे देष के लिए मार्ग दर्षक के रूप में कार्य करेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य में 39 हजार 967 बस्तीयों में जल स्त्रोत से पेयजल की आपूर्ति होती है और कई सफलतम प्रयोग किए गए है। और करीब 709 बस्ती पेयजल योजना से जुंझ रही है,12 हजार पांच सौ वन पंचायते है पेयजल स्त्रोत के संर्वद्धन के हर संभव प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि समाज में परिर्वतन तभी होगा जब वर्शा के जल को संरक्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि विकास की इस दौड़ में हम जल स्त्रोत को वापस रिचार्ज नहीं कर पा रहें है। जल संरक्षण एवं संर्वद्धन के लिए कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने का कि यदि हम वर्शा के जल को तीन प्रतिषत भी जमीन में संर्वद्धन करे तो आने वाले समय में हमें पानी की कमी से जुझना नहीं पड़ेगा। उन्होंने भरोसा दिया कि वर्श 2022 तक कोई भी गांव प्यासा नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में 132 गंगा गांव है जबकि कुल  4 हजार पांच सौ गांव है। जो इस परियोजना के तहत सम्मलित है।
सचिव पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय भारत सरकार परमेष्वरन अयर ने स्वजल परियोजना को लेकर विस्तार से जानकारी दी। कहा कि स्वजल पायलेट प्रोजेक्ट पांच राज्यों में शुरू किया गया है।
इस मौके पर क्षेत्रीय विधायक गोपाल सिंह रावत ने जनपद में स्वजल पायलेट प्रोजेक्ट को शुरू करने पर  केन्द्रीय मंत्री का हार्दिक आभार प्रकट किया। विधायक ने सडग गांव के लिफ्ट योजना के लिए मोटर देने की घोशणा की और पाईप देने के लिए पेयजल मंत्री श्री पंत से अनुरोध किया। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष जशोदा राणा ने भी संबोधित किया।

इस दौरान जिलाध्यक्ष भाजपा श्याम डोभालमहानिदेषक स्वच्छ भारत मिषन भारत सरकार अक्षय राउत, संयुक्त निदेषक पेयजल मंत्रालय भारत सरकार सत्यव्रत साहू, जिलाधिकारी डा. आषीश चौहान, मुख्य विकास अधिकारी विनीत कुमार, रावल हरीश सेमवाल, उपजिलाधिकारी सौरभ असवाल, देवेन्द्र नेगी, सहित सैकड़ो ग्रामीण उपस्थित थे।

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