उत्तरकाशी : यमुनोत्री जहा शनि, हनुमान और यम का विशेष आषीश मिलता है , कपाट ओपनिंग सेरेमनी

उत्तरकाशी : यमुनोत्री जहा शनि, हनुमान और यम का विशेष आषीश मिलता है , कपाट ओपनिंग सेरेमनी

यमुनोत्री मंदिर -फोटो- सुनील थपलियाल

सुनील थपलियाल / उत्तरकाशी 

प्रसिद्व धाम यमुनोत्री के कपाट कल (आज ) वैद्विक मन्त्रोचारण के साथ आम श्रद्वालुओ के लिए खुल जायेगे। कपाट खुलने का दिन अक्षय तृतीय विषेश है आज के दिन मां यमुना से मिलने सूर्य पुत्र यमराज जो यमुना के भाई है और चचेरे भाई शनिदेव सहित गुरू भाई भगवान हनुमान मिलने आते है , यमुनोत्री धाम में आज के दिन स्नान व पुजा अर्चना करने मात्र से मां यमुना उसके जन्म जन्मान्तर के सभी पाप नष्ट  कर देती है और तो और उसे सूर्य लोक की प्राप्ति होती है। मां यमुना के कपाट अक्षय तृतीय को हर वर्ष  खुलते है और भैया दूज के दिन बन्द हो जाते है , देश  विदेश  के लाखो श्रद्वालुओ ने मां यमुना के दर्शन को  आते है
मान्यता के अनुसार यमुनोत्री धाम चार धामो में सबसे पहला दर्षनीय स्थल है उत्तराखण्ड में जो भी श्रद्वालु आता है वह यही से अपनी यात्रा की षुरूआत करता है कहते है कि यमुनोत्री धाम में मां यमुना के पास यमराज , षनिदेव और हनुमान हमेषा अक्षय तृतीय पर्व और भैयादूज पर्व पर मिलने आते है आज के दिन जो भी श्रद्वालु यमुनोत्री धाम में आकर मां यमुना के दर्षन , पुजा अर्चना व स्नान करता है उसको यम यातनाओ से मुक्ती , षनिदेव की कुदृश्टि से निजात और भगवान हनुमान का विषेश आर्षिवाद मिलता है। कहते है कि भगवान षनिदेव यमुना के मायके खरसाली में विराजमान है तो यमुनोत्री धाम के उपर बन्दर पुंछ की चोटी में आज भी भगवान हनुमान जी तपस्या कर रहे है कहते है कि तप पुरूशो को कई बार तो हनुमान जी ने दर्षन भी दे दिये है। यमुनोत्री धाम की बात करे तो यहां पर सूर्य कुण्ड जहंा पर गर्म पानी (खौलता हुआ ) हर श्रद्वालु प्रसाद के रूप में चावल और आलु पकाकर अपने घर ले जाता है , और हर श्रद्वालु को यहां पर दिव्य षिला के दर्षन भी होते है और तो और तीर्थ पुरोहित यही पर पुजा अर्चना करवा कर श्रद्वालु को आर्षिवाद देते है। यहां पर महिला और पुरूशो के लिए दो स्नान कुण्ड भी है । यमुनोत्री धाम के जहंा जानकीचट्टी तक मोटर रोड़ की सुविधा है वही पांच किलो मीटर की दुर्गम खड़ी चढाई चढ़ कर यात्री को आना होता है और जब वह थका हारा होता है तो इन स्नान कुण्ड मंे स्नान कर उसकी सारी थकान समाप्त हो जाती है । उसे लगता ही नही की हमने पंाच किलोमीटर की दुर्गम पैदल यात्रा चढ़ी होगी। मां यमुना की पुजा अर्चना छः माह यमुनोत्री धाम में होने के बाद भैया दूज के दिन कपाट षीतकाल के लिए बन्द कर दिये जाते है और मां की उत्सव डोली को दुल्हन की तरह सजा कर ढोल नगाड़ो व षंख ध्वनी के साथ खरसाली यानी खुषीमठ लाया जाता है जहां षीतकालीन यमुना मन्दिर में मां यमुना की भोग मूर्ति को रखा जाता है और यही पर खरसाली के उनियाल जाति के तीर्थ पुरोहित पुजा अर्चना करते है। और तो और अब तो उत्तरखण्ड सरकार ने षीत कालीन यात्रा भी षुरू की हुई है जो लोग ग्रीश्मकाल में यमुनोत्री नही आ पाते वह षीतकाल में खरसाली आकर मां यमुना के दर्षन कर पायेगे। भले ही आपदा के बाद षीतकाल में यात्रा पर कुछ विराम लग गया था लेकिन आगामी वर्शो में षीतकाल में भी यात्रा कर जो श्रद्वालु मां यमुना के आर्षिवाद को लेना चाहे वह खरसाली आकर मां यमुना के दर्षन कर सकते है। पर अब छः माह तक सभी देष विदेष के आम श्रद्वालु यमुनोत्री धाम आकर यमुनोत्री की खुबसूरत घाटियो का आनन्द लेते हुए मां के दर्षन कर सकते है।

  • Ground0

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