दहकते अंगारों पर नाचे पश्वा

दहकते अंगारों पर नाचे पश्वा

  • मधुसूदन जोशी / रुद्रप्रयाग

जाखधार में लगने वाले जाख मेले में रविवार को जब जाख देवता के पश्वा ने ढोल की थाप पर जब दहकते हुए अंगारों में नृत्य किया तो, यहां मौजूद सैकड़ों भक्तों की आंखें नम हो गई। इसके बाद जाख देवता ने भक्तों को आशीर्वाद भी दिया।

गुप्तकाशी के जाखदार में लगने वाला ये जाख मेला क्षेत्र की 14 गांवों की आस्था जुड़ा है। इस मेले को देखने हर साल दूर-दराज के इलाकों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे है। मान्यता है कि विशाल अग्नि कुंड के दहकते अंगारों पर नर पश्वा नृत्य कर लोगों के दुखों को हर लेते है। पश्वा के अंगारों पर नृत्य संपन्न होने के बाद भक्तगण अग्नि कुंड की भभूत को प्रसाद रूप में निकाल कर पास में रख लेते है। सुबह ढोल दमाऊ की थाप और यक्ष के जयकारों के साथ ही नारायणकोटी गांव से यक्ष के नर पश्वा ने जाख मंदिर की ओर प्रस्थान किया। पश्वा ने देवशाल पहुंचने पर विन्ध्यवासिनी मंदिर के मुख्य मंदिर की तीन परिक्रमायें पूर्ण की। यहां से जाख की देव कंडी और जलता दीपक पश्वा की अगुवाई करते हैं। ढोल सागर के बीच नर पश्वा के शरीर में देवता का अवतरण हुआ, इसके बाद पश्वा मंदिर के आगे पहुंचकर लोगों की बलायें लेते हुये विशाल अग्नि कुंड में कूद गये और इसके बाद बूंदाबांदी होने लगी। मान्यताओं के अनुसार जब नर पश्वा अग्नि कुंड में नृत्य करते हैं, तो बरसात शुरू हो जाती है। इसे बरसात के देवता के रूप में भी जाना जाता है। जब क्षेत्र में सूखा पड़ने लगता है, तो स्थानीय लोग जाख देवता को प्रसन्न करने के लिये पूजा अर्चनायें करते है। जिसके तुरंत बाद क्षेत्र में बरसात शुरू हो जाती है।

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