दून लिट्रेचर फेस्टिवल : बाढ़ में डूबे हैं लेकिन पीने को पानी नहीं

दून लिट्रेचर फेस्टिवल : बाढ़ में डूबे हैं लेकिन पीने को पानी नहीं

  • गजेंद्र रौतेला

22 दिसम्बर से शुरू हुए दूसरे दून लिट्रेचर फेस्टिवल की शुरुआत बच्चों के द्वारा गुब्बारे उड़ा कर किया गया।स्वागत सत्र में स्मारिका के लोकार्पण व संबोधन के मुख्य वक्ता बी0 के0 जोशी ,लीलाधर जगूड़ी,एस0 फारुख व वीरेंद्र रावत थे जिसका संयोजन मोना बाली ने किया।ब्याख्यान के प्रथम सत्र में भारत में सांस्कृतिक विविधता विषय के मुख्य वक्ता गणेश देवी,शेखर पाठक,ज्ञानेंद्र पांडेय व हम्माद फारुखी थे जिसमें वक्ताओं ने कहा कि सांस्कृतिक विविधता ही भारत की विशेषता है।इस सत्र का संयोजन पल्लव ने किया।नव लेखन मंच (बाल लेखकों की कार्यशाला) रचनात्मक लेखन के विविध आयाम विषय के वक्ता जितेन ठाकुर ,गिरीश सुंदरियाल व गजेंद्र रौतेला रहे।जिसमें वक्ताओं ने कहा कि बच्चों को स्थापित आदर्शों को तोड़ते हुए भी अपने रचना संसार में रचनात्मक सृजन करने की कोशिश करनी चाहिए।वहीं दूसरे सत्र में सोशल मीडिया के दौर में विषय के मुख्य वक्ता NDTV के प्रियदर्शन,News 18 की मनीषा पांडे व टाइम्स ऑफ इंडिया के रोहित जोशी रहे।

जिसमें प्रियदर्शन ने कहा कि आज सूचनाओं की बाढ़ है लेकिन पीने लायक पानी नहीं है।तीसरे सत्र में हिंदी साहित्य में गाँव विषय पर मुख्य वक्ता पंकज बिष्ट,शिवमूर्ति,दिनेश कर्नाटक व कुशल कोठियाल रहे।जिसका संयोजन खेमकरण सोमान ने किया।जिसमें वक्ताओं ने कहा कि हिंदी के साहित्य की जड़ें गांव से ही होकर आती हैं।चौथे सत्र में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग क्षेत्र में मानव तस्करी पर काम कर रही रंगू सरोया से संवाद का संयोजन उमेश ध्यानी ने किया।सांस्कृतिक संध्या के सत्र में कुसुम पंत द्वारा फट जा पंचधार नाटक व अमित सागर की टीम द्वारा शानदार प्रस्तुति के साथ प्रथम दिन का समापन हुआ।

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