महिला दिवस विशेष : पहाड़ की इन बेटियों के पहाड़ जैसे बुलंद हौंसलो नें लिखी नई इबादत, दिखलाई नयी राहें

महिला दिवस विशेष : पहाड़ की इन बेटियों के पहाड़ जैसे बुलंद हौंसलो नें लिखी नई इबादत, दिखलाई नयी राहें

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आज महिला दिवस है। लीजिए आज आपको रूबरू करवाते हैं पहाड़ की ऐसी बेटियों से जिन्होंने अपने मेहनत और बुलंद हौंसलो से एक नयी कहानी गढ़ी है। और अपना मुकाम खुद हासिल किया है। वही आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

‘अफसर बिटिया’ त्रिप्ति भट्ट! — बेहद कम समय में अपनी कार्यशैली से प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश को प्रभावित करने वाली आईपीएस अफसर बिटिया त्रिप्ति भट्ट जो वर्तमान में पुलिस अधीक्षक चमोली के पद पर कार्यरत हैं। चमोली में 11 महीने के अपने कार्यकाल में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। अपनी कार्यशैली से उन्होंने जनपदवाशियों का दिल जीत लिया है। इस दौरान उन्होंने न केवल अपराधों पर अंकुश लगाया अपितु जागरूकता अभियान भी चलाया। पुलिस चौपाल, वरचुअल थाना, फ्रस्ट रिस्पोंडिग यूनिट, सहित कई अभियानों की शुरुआत कर नयी मिशाल पेश की। पहाड़ की अफसर बिटिया त्रिप्ति भट्ट हजारों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है।

गंगा असनोडा! – एक गंगा जिसे नदी का दर्जा हाशिल है। गोमुख से गंगा सागर तक अपने 2525 किमी के सफर में लाखों लोगों के लिए आजिविका का बंदोबस्त करती है। देश की आधी आबादी की जीवनरेखा है ये गंगा। वहीं दूसरी ओर पहाड़ की एक बेटी है गंगा असनोडा थपलियाल जो वर्तमान मे रीजनल रिपोर्टर हिंदी मासिक पत्रिका की संपादक हैं। अमर उजाला से लेकर रीजनल रिपोर्टर तक उन्होंने जनसरोकारो की पत्रकारिता को नया मुकाम दिया। जीवन में दुःखों के ऐसे पहाड़ से सामना हुआ कि अक्सर ऐसे घटनाओं के बाद लोग बिखर जाते हैं बुरी तरह टूट जाते हैं। लेकिन गंगा असनोडा नें जिस बहादुरी और जीवटता के साथ न केवल विपरीत परिस्थितियों से सामना किया बल्कि रिजनल रिपोर्टर पत्रिका का सीमित संसाधनों के बाद भी सफल संचालन किया। गंगा नें पहाड़ की बेटियों के लिए उदाहरण पेश किया की जीवन में बुलंद हौंसलो से अपना मुकाम खुद बनाया जा सकता है। और बेटियाँ दरांती की जगह कलम आखर से नया सबेरा लिख सकती है।

डॉ कविता भट्ट! — हे.न.ब.गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर (गढ़वाल) में कार्यरत डाॅ कविता भट्ट आज साहित्य के क्षेत्र मे अपनी चमक बिखेरे हुये हैं। वे वर्तमान मे उन्मेष, ज्ञान-विज्ञान विचार संगठन, भारत की महासचिव हैं जबकि हिन्दी चेतना” (हिन्दी त्रैमासिक) की भारत की प्रतिनिधि है। इनकी छ: पुस्तकें घेरंड संहिता में षटकर्म, योगाभ्यास और योग, योग परम्परा में प्रत्याहार, योग दर्शन में प्रत्याहार द्वारा मनोचिकित्सा, योग के सैद्धांतिक एवं क्रियात्मक पक्ष, सूर्य (ज्ञान-विज्ञान), चन्द्रमा (ज्ञान-विज्ञान), दो काव्य संग्रह आज ये मन, मन के कागज़ पर प्रकाशित हो चुकी हैं जबकि ऑनलाइन कविताएँ- हिंदी साहित्य के विश्वकोश उपलब्ध हैं। दर्शनशास्त्र, योग, अंग्रेजी, समाजकार्य में स्नाक्तोतर, नेट, पीएचडी की उच्च शिक्षा प्राप्त डाॅ कविता भट्ट आज पहाड़ की बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत है कि पहाड़ की बेटियाँ केवल लकड़ी लेने और घास काटने तक सीमित नहीं हैं। वे चाहे तो अपनी मंजिल खुद बना सकती हैं।

मानसी नेगी!– खेलो इंडिया स्कूल खेलो में तीन हजार मीटर वाक रेस में गोल्ड मैडल झटकनें वाली मानसी नेगी ने पूरे देश में चमोली ही नहीं बल्कि उत्तराखंड का भी नाम रोशन किया है। मानसी की सफलता नें तो पहाड़ की बेटियों को मानो कुछ अलग करने का हौसला दिया है। पेशे से मैकेनिक मानसी के पिता लखपत सिंह नेगी की 2016 में मृत्यु हो चुकी है। मानसी की मां शकुंतला देवी गांव में ही खेती मजदूरी कर बेटी को आगे बढ़ने का हौसला देती रही। यही कारण है कि बेहद अभावों में भी उसके अंदर कुछ अलग करने का जज्बा हमेशा रहा। विपरीत परिस्थितियों में भी मानसी नें अपना हौंसला नहीं खोया। मानसी नेगी पहाड़ की बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत है कि बेटियाँ हर क्षेत्र मे अपना परचम लहरा सकती हैं।

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