सुप्रभात : उसने कॉलेज छोड़ने के तीन साल बाद मैडम से कहा “सॉरी”

सुप्रभात : उसने कॉलेज छोड़ने के तीन साल बाद मैडम से कहा “सॉरी”

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  • सोनी कन्हैया, नागपुर, महाराष्ट्र

ज्योति मैडम, कालेज छोड़े तीन साल बीत चुके हैं । जूनियर कॉलेज के वो दो साल, आज भी उसकी यादें ताजा हैे । मैने उन दो सालों में बहुत कुछ सीखा । कॉलेज की सबसे खास यादों में सिर्फ आपका ही नाम है । मेरे विश्लेषण से मुझे ये रिश्ता मुझे खास लगा ।

आप एक गुरू थीं । आपने मुझे जीवन का ज्ञान दिया और सबसे खास बात ये कि जीवन की वास्तविकता क्या होती है मैने आपसे ही सीखा । पहले दिन से ही कॉलेज के मेरे मन में जुनून था कि मैं अपनी एक अलग पहचान बनाऊं, परंत पहचान बनाने की होड़ में मैं उस दिन अपना व्यवहार करने का तरीका भूल गई थी ।आपकी कक्षा में शायद मैंने हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयत्न किया । मैने हमेशा से ही आपकी चहेती विधार्थी बनने की कोशिश की थी । आप हमें  हिंदी पढ़ाती  थी । लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद आखिरी ईकाई परीक्षा में थोड़े कम नंबर मिलने पर आप मुझसे नाराज हो गई थीं और आपने मुझे कहा था, “सोनी, अब तुम ओवर कान्फिडेंट हो चुकी हो ।”

इतना सुनते ही मैने अपना आपा खो दिया । क्योंकि, मैं समझती थी ओवर कान्फिडेंट होना एक गुनाह है और यहां से असफलता का रास्ता खुलता है । इसलिए आपसे मेरी थोड़ी बहस हो गई । मैं नादान उस समय समझ नहीं पाई कि आपका इशारा किस तरफ है और आप क्या कहना चाह रही हैं । उस समय में काफी तनाव में आ गई थी । उस समय मैंने एक पल के लिए भी यह नहीं सोचा कि मैँ इस तरह का व्यवहार किसलिए औश्र किसके साथ कर रही हूं ।

घर आकर जब उस बहस के बारे में सोचा, तो पता चला मुझसे कितना बड़ा अपराध हो गया । जिन्होंने मुझे शिक्षा का ज्ञान दिया उसी गुरू से बहस कर मैंने उन्हें अपमानित किया । दूसरे दिन मैँ खुद को इस काबिल भी नहीं समझ पाई कि आपको सॉरी कह सकूं ।

आज इस खत के जरिए मैँ आपसे  दिल से माफी मांगना चाहती हूं  और अपनी गलती स्वीकारते हुए वादा करती हूं कि जिंदगी के किसी भी मोड़ पर मैँ किसी के साथ इस तरह का बर्ताव नहीं करूंगी । मेरी नादानी समझकर हो सके, तो मुझे माफ कर दीजिएगा, शायद मैं अपने आपको इस बात के लिए कभी माफ न कर पाऊं, पर आप मुझे प्लीज क्षमा कर देना

  • साभार

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