हरेला अभियान का पहला पौधा स्वo कमल जोशी को समर्पित

हरेला अभियान का पहला पौधा स्वo कमल जोशी को समर्पित

  • संजय चौहान 

धाद का आगामी एक महीने तक चलने वाला हरेला अभियान आज से शुरू हो गया। देहरादून के गांधी पार्क से इस अभियान का आगाज उत्तराखंड के प्रसिद्द छायाकार स्वo कमल जोशी की इन पक्तियों के साथ प्रारंभ हुआ।

हरेला का मतलब सिर्फ एक दिन
किसी पात्र में कुछ बो देना नहीं!
हरेले का मर्म है प्रकृति को समझना!
उसका आदर करना! हम करते क्या हैं–?
एक दिन कान के पीछे जौ की पत्तियां लटका कर!
लाल टिका लगा कर !
अपनी संस्कृति की इत्श्री कर देते है !
हमें हरियाली का आदर करना सीखना है!
मेरी आकांक्षा हरेला या हरियाली पर…?
हरियाली वो जो हो किसी बच्चे के चेहरे पर हो !
या खेत को देखते किसान के होंठों पर हो!
या जंगल के झूमते पेड़ों पर हो !
या किसी बहन के आँचल पर छई हो .!
या किसी वृद्ध जन की आँखों में झलक रही हो !
मुझे ऐसी हरियाली चाहिए..कर्मकांड वाली नहीं..!
हरेले का मतलब ये है मेरे लिए ..!
और यही मेरे हरेले का संकल्प है.!

जिसके बाद हरेला अभियान का प्रथम पौधा देहरादून के मेयर विनोद चमोली,पद्मश्री अनिल जोशी, साहित्यकार गीता गैरोला द्वारा उत्तराखंड के सामाजिक कार्यकर्त्ता और छायाकार स्व कमल जोशी की स्मृति मैं रोपित किया गया।

धाद द्वारा हरेला को शासन से इतर आम समाज और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने की मुहीम आज गाँधी पार्क से प्रारंभ हुई। जहाँ हरेला से घी सगरांद तक प्रस्तावित माह भर के आयोजनों का शुभारम्भ लोककला केंद्र की रीता भंडारी, बिमला नेगी, शैव्या पंडित डॉली बडोला, तृप्त कुकरेती,रिया कन्नोजिया,देवंशी सैनी, शानिया कन्नोजिया,अनीता कुकरेती द्वारा—–!
फल-फूलों की डाली लगौला झुमेलो, घर-घर्युं माँ डाली लगौला झुमेलो—– गीत से हुई।

इस अवसर पर धाद के हरेला अभियान का परिचय देते हुए सचिव तन्मय ममगाईं ने बताया की धाद की बरसों पुरानी मुहीम आज रंग ला रही है। आज जब शासन और समाज वृहद् स्तर पर हरेला का आयोजन हो रहा है। हम इसे महज पौधरोपण तक न सीमित करें बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक पर्व भी बनाएं। छायाकार स्व कमल जोशी के हिमालय और आम समाज के प्रति योगदान पर बोलते हुए उनके बड़े भाई पद्म श्री अनिल जोशी ने कहा की उनके जीवन का अवसान दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितयों मैं हुआ। लेकिन वो पहाड़ के सच्चे योद्धा थे। उनकी आम समाज के द्वारा दी गयी यह श्रद्धांजलि उन्ही पहाड़ों समृद्धि और हरियाली के निमित्त है। जिसकी पैरवी वो आजीवन करते रहे। उन्होंने कहा की सच तो ये है की हरेला ही एक ऐसा कार्यक्रम है जो पहाड़ की परिभाषा मैं खरा उतरता है।

महिला समाख्या की पूर्व निदेशक गीता गैरोला ने उनका भावपूर्ण स्मरण करते हुए कहा की कमल जोशी को 13 वर्ष की उम्र मैं दमा हो गया था। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पहाड़ के दुर्गम और दुरूह ऊँचाइयों को अपने कैमरे मैं कैद किया। उन्होंने न केवल खुद को बल्कि एक पुरे समाज को सरोकारों के प्रति सचेत किया उन्होंने विशेष रूप से महिला अधिकारों के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मैती आन्दोलन के कल्याण सिंह रावत ने धाद के इस प्रयास को साधुवाद दिया और हरियाली की इस मुहीम मैं आम समाज से आगे बढ़ कर आने की अपील की। उत्तराखंड मैं १०८ सेवा के प्रणेता अनूप नौटियाल ने धाद की इस मुहीम को एक बेहतरीन और संवेदनशील पहल बताया।

धाद का परिचय देते हुए अध्यक्ष हर्षमणि व्यास ने बताया की धाद ने भाषा साहित्य संस्कृति उत्पादकता को लेकर अपने विभिन्न एकांशों के माध्यमों से जनसहभागिता की मुहीम छेड़ दी है। और उसे मिल रहा सहयोग इस बात का परिचायक है कि वो सही राह पर है। संस्था के उपाध्यक्ष डी सी नौटियाल ने हरेला अभियान को जनसहभागिता से शासन के एजेंडे तक ले जाने की यात्रा के बाबत बताया और इस मुहीम मैं जुडे रहे सभी लोगों का आभार प्रकट किया। पार्क में पौधरोपण करने से पहले मेयर विनोद चमोली ने कहा कि दून की सड़कों पर लगाई जा रही धाद सुदूर पहाड़ों तक पहुंचानी होगी और इसके लिए आम नागरिकों को इस मुहीम में साथ देना होगा। मेयर और अन्य लोगों ने धाद लोक वाद्य एवं लोक कला संवर्धन स्वायत्त सहकारिता के अखिलेश और साथियों द्वारा ढोल दमाऊं की थाप पर पहाड़ का परम्परागत नृत्य भी किया। कार्यक्रम का संचालन रविन्द्र नेगी ने किया।

कार्यक्रम में रोशन धस्माना, डॉ माधुरी बर्थवाल, समदर्शी बर्थवाल, अभिषेक मैंदोला, भूमेश भारती, चन्द्रशेखर चौहान, दिनेश कंडवाल, नवीन नौटियाल, कल्पना बहुगुणा, तोताराम ढौंडियाल, शांति प्रकाश, वीरेंद्र खंडूरी, बिरेश, अनुपमा, समीर मुंडेपी, अनुव्रत नवानी, एच वी वर्मा, साकेत रावत, ब्रिज मोहन उनियाल, विकास बहुगुणा, बीना कंडारी, कुलदीप कंडारी, प्रेमलता सजवाण, जगमोहन सजवाण, सुदीप जुगलाण, सुमित्रा जुगलान, अपूर्व आनंद, कैलाश कंडवाल, डॉ नुतन गैरोला, पूनम नैथानी, शोभा रतूड़ी, आशा पैनुली, डॉ अर्चना डिमरी, सविता जोशी, कांता घिल्डियाल, खुशहाल सिंह बिष्ट, बीना बिष्ट, त्रिलोचन भट्ट, सुधा भट्ट, बसंती बिष्ट, शिव प्रकाश लोधियाल, ऐ के सिंह व धाद से जुड़े कार्यकर्ताओ के साथ विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग भी शामिल थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

मसूरी में श्रीदेव सुमन को किया गया याद

 सुनील सोनकर / मसूरी  मसूूरी श्रीदेव सुमन विचार