पुलिया को मत छेड़िये, नाजुक इसके अंग

पुलिया को मत छेड़िये, नाजुक इसके अंग

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● लोकेन्द्र सिंह बिष्ट, उत्तरकाशी

काम बड़े हैं आपके,,
जनता समझ न पाए।।
पुल बनाये आपने
पवन लिए उड़ाए।।
पुलिया को मत छेड़िये,
नाजुक इसके अंग।।
कदम एक जो धर दिया,,
गिर पड़ोगे संग।।
गिर पड़ोगे संग,,
यहां से जल्दी खिसको।।
सरकारी निर्माण है ये,,
इसको दूर से ही देखो।।

 

एक कवि की ये कविता व्यंग्य उत्तराखंड और उत्तरकाशी में करोड़ों रुपयों की लागत से बन रहे पुलों पर सटीक बैठती हैं,,जो बनते ही टूट रहे हैं धराशायी हो रहे हैं और यहां एक नहीं दर्जनों घटनाएं पिछले 7 वर्षोँ में हो चुकी हैं ।

( पुलिया की पिछले वर्ष की तस्वीर )

अधूरे तिलोथ पुल के बाद 3 दिसंबर 2018 को बात करते हैं अधूरे अठाली पुल की।जिसका कार्य आजतक शुरू नही हो सका, जो आज तक उत्तरकाशी के विकासपुरुषों के लिए और सरकारों के लिए भी एक अभूझ पहेली बनकर रह गई है ।

क्योंकि कि इन घटनाओं और जनता की पीड़ा व समस्याओं से सरकार को जिम्मेदार लोगों द्वारा अवगत ही नही कराया जाता है ।

आप सबको थोड़ा फ्लैशबैक में पुरानी घटनाओं की ओर लिए चलता हूँ।ये घटना 23 मई 2016 की है जब उत्तरकाशी घाटी में एक घंटे तक तेज हवाएं चली थी।
आपदा भी अजीबोगरीब होती है।
किसी का छप्पर ही उखाड़ कर ले जाती है और किसी को छप्पर फाड़ कर दे जाती है।यही अपने उत्तरकाशी में हो रहा है।।
गंगा भागीरथी पर अठाली के पास NBCC द्वारा बनाया जा रहा 10 करोड़ की लागत से बनने वाला
भारीभरकर 400 टन वज़नी मोटर पुल किसी तिनके की तरह बिखर कर नदी में जा गिरा ।तबकी बार तो आपदा और आंधी तूफ़ान बहाना बना । लेकिन इससे पहले भी NBCC द्वारा असीगंगा पर बनाया जा रहा 4 करोड़ की लागत वाला पुल डिगिला पुल भी वर्ष 2105 में धड़ाम से गिरा था। तब तो न आंधी थी न तूफान फिर डिगिला पुल क्यों गिरा था और सरकार ने क्या कार्यवाही की??

(पुलिया की इस वर्ष की तस्वीर )

बताते चलें कि नदी और घाटी में बनने वाले पुलों की तकनीकी और डिजाइनिंग इस तरह से की जाती है कि तेज़ आंधी तूफ़ान और चक्रवाती तूफानों को भी बर्दास्त करने में जो सक्षम हो।
फिर इस पुल पर तकनीकी क्यों मात खा गई और इसकी डिजाइनिंग को क्यों ग्रहण लगा।
ये एक अहम सवाल है !!
बहरहाल कांग्रेस सरकार के तब के नुमाइंदे की तरफ से रटा रटाया बयान आया था कि FIR दर्ज होगी, जांच होगी वगैरह वगैरह, डिगिला पुल गिरने पर भी इसी तरह का बयान आया था,तब क्या हुआ? 23 मई 2106 के बाद अठाली पुल एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बना था। लेकिन ढाई साल बाद भी आज भी अठाली पुल का कार्य बंद पड़ा है ।कार्यदायी संस्था NBCC घोड़े बेचकर सो रही है औऱ प्रशासन के नुमाइंदे चना खाकर और जर्सी गाय का दूध पीकर सो रहे हैं।
अतः प्रदेश के अपने लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी से निवेदन है कि इस 6 करोड़ की लागत से बनने वाले अधूरे तिलोथ पुल व 10 करोड़ की लागत से बनने वाले अठाली मोटर पुल के तत्काल निर्माण कार्य शुरू करने के लिए संबंधित को आवश्यक दिशा निर्देश जारी करने की कृपा करें । ताकि जनता को सहूलियत मिल सके।

।।प्रणाम।।

● TEAM GROUND 0

 

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