“पनपतिया ग्लेशियर प्रकरण”क्या यहां ट्रैकिंग की अनुमति थी,

“पनपतिया ग्लेशियर प्रकरण”क्या यहां ट्रैकिंग की अनुमति थी,

पनपतिया में ट्रेकरों के गायब होने का मामला.

23 लोग बिना अनुमति के कैसे पहुंचे पनपतिया?

यदि बिना अनुमति के गया डा तो होगी कानूनी कार्यवाही.

.संजय कुंवर जाेशीमठ,
खराब माैसम के बीच बाकी बचे हुये सभी ट्रैकराें का रैस्क्यू खराब माैसम के बीच लगातार मदमहेश्वर घाटी में चल रहा है। लेकिन इस बीच एक बडा सवाल उठ रहा कि क्या इनके पास ट्रैकिंग की अनुमति थी यदि हां ताे किस कम्पनी नें इन्हें गाईड पाेर्टर उपलब्ध कराये है।जाेशीमठ प्रशासन सहित एडवेंचर एशा्सिएसन और वन विभाग पूरी डिटेल खंगालनें में जुटा है । क्याेक् गत वर्ष भी ऐसा ही हादसा इसी रूट पर हुआ था तब भी एक बंगाली पर्यटक की माैत हुयी थी और पनपतिया ग्लेशियर ट्रैकराें के फंसने वाले मामले पर अब जाेशीमठ प्रशासन और एडवैंचर एशाेसिएसन भी जांच पड़ताल में जुट गया है कि आखिर 23लाेग बिना अनुमति के कैसे जाेशीमठ लामबगड खिराें वैली हाेकर पनपतिया की तरफ चले गये और यदि इनके पास काेई स्थानीय टूर आपरेटर की स्लिप या परमिट हाे तब मामला हल्का हाे सकेगा।वही दल में दाे पाेर्टर हरि सिंह/दीपक चाैहान उर्गम घाटी के बताये जा रहे है जाे सुरक्षित है।

बता दे कि जाेशीमठ ब्लाक के सभी तरह के फारेस्ट एरिया सहित ट्रैक रूटाें में पथाराेहण सहित किसी तरह की एक्टविटी के लिये नन्दादेवी नेशनल पार्क से अनुमति के साथ एडवेंचर एशाेसिएसन जाेशीमठ से जुडे किसी एक एजेन्सी से सम्पर्क कर उक्त संस्था के द्वारा दिये गये विवरण और प्रार्थना पत्र के अनुसार ही ट्रैकिंग की अनुमति वनविभाग में शुल्क जमाकर मिलती है और आपरेटर शुल्क की अलग से रसीद काटनी पडती है।  बिना अनुमति पकडे जानें पर वनविभाग वन्यजीव एक्ट सहित बफर जाेंन/काेर जाेंन /संरक्षित छेत्र से सम्बंधित वन्यजीव धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जुर्माना वसूलता है और जेल हाे जाती है और पनपतिया -खिराे वैली छेत्र बफर जाेंन का ईलाका है जाे केदारनाथ वन प्रभाग/नन्दादेवी राष्ट्रीय पार्क का बफर जाेंन के तहत आता है, यहां बिना परमिट विचरण करनें पर ही वन्यजीव अधिनियम की कई धारायें लग जाती है ।ऐसे में यदि इस दल के पास ट्रैकिंग की अनुंमति नही पाई गई ताे दल पर कानूनी कार्यवाही हाेना निश्चित है ।एडवेंचर एशाेसिएसन और वन विभाग काे जल्द इस प्रकरण पर जांच बिठा दाेषियाे पर कार्यवाही करनी चाहिये ताकि आगे से इस ट्रैक पर ऐसे हादसे न हाे पायें। और बचाव दल काे इस तरह मुश्किलाें का सामना न करना पडें।

TEAM GROUND 0.

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