टिहरी बनेगा इंटरनेशनल लेवल का डेस्टिनेशन CM

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मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को नई टिहरी में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि राज्य सरकार पर्यटन को उत्तराखण्ड में रोजगार सृजन के बड़े माध्यम के रूप में देख रही है। टिहरी झील में कैबिनेट बैठक आयोजित करने का एक बड़ा मकसद यही था कि टिहरी झील सहित उत्तराखण्ड के तमाम पर्यटन स्थलों को दुनिया के पर्यटन नक्शे पर लाया जा सके।
मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र ने कहा कि इसी कड़ी में टिहरी लेक फेस्टिवल भी आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टिहरी झील के सर्वांगीण विकास से घनसाली, प्रतापनगर व चिन्यालीसौड़ तक लोगों को विकास का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार रोजगार वर्ष के रूप में यह वर्ष मना रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के अधिक से अधिक अवसर सृजित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र ने कहा कि सरकार द्वारा लाई गई पिरूल नीति में प्रदेश में हर साल उपलब्ध लगभग 14 लाख मीट्रिक टन पिरूल से 150 मेगावाट बिजली बनने की तथा 60 हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होने की संभावना है। पिरूल नीति का लाभ उठाकर गांव की महिलाएं और नौजवान हर माह 8 से 10 हजार रूपये की आय प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि 25 किलोवाॅट बिजली के उत्पादन के लिए लगभग ढाई नाली जमीन(500 वर्ग मीटर) की आवश्यकता होगी और इससे लगभग 10 लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार भी प्राप्त होगा।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री  ने बुधवार को टिहरी की कोटी कालोनी में पहुँच कर टिहरी लेक फेस्टिवल की तैयारियों का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री कैबिनेट की मीटिंग में प्रतिभाग करने टिहरी पहुँचे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि टिहरी लेक फेस्टिवल का राष्ट्रीय स्तर के साथ ही विदेशी पर्यटकों के मध्य भी प्रचार किया जाय। टिहरी को इंटरनेशनल स्तर का टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाना है। बाहर से सैलानियों को आकर्षित किया जाय। उनके अनुभवों को रेकार्ड करने तथा इसके फीड्बैक की भी व्यवस्था की जाय।
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