580 साल पुराने मंदिर मेे मनाया गया ये खास पर्व

580 साल पुराने मंदिर मेे मनाया गया ये खास पर्व

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रिपोर्टर सुनील सोनकर 
मसूरी पहाडो की रानी से लगभग 8 किलो मीटर कि दूरी पर हरे भरे पहाडों के बीच में 580 साल पूराना नागमंदिर में नागपंचमी का त्यौहार धूमघाम के साथ मनाया गया। नागपचंमी के पर्व पर हजारों कि संख्या में मसूरी और आसपास के क्षेत्रो से हजारों की सख्या में भक्त नाग देवता के दर्शन के लिये पहुंच रहे है ।

मंदिर के पुजारी जयदेव प्रसाद ने बताया की मसूरी का नाग मंदिर 580 साल पुराना है जिसकी मान्यता है कि मसूरी के भट्टे गांव में एक गाय थी जो अक्सर सुबह इस जगह पर आती थी और एक पत्थर को अपने थन से दूध चढाती थी जब गांव वालों ने उस गाय के दूध के बारे में जांच पडताल कि की इस गाय का दूध कहा जाता है तब उन्हें पता चला कि यह गाय एक पत्थर को अपना दूध चढाती थी तब गांव वालों ने महापरुषों को यह बात बताई और उनके द्वारा पता चला कि यह पत्थर साक्षात नाग देवता का रुप है और तब इस जगह को सिद्व पीठ के रुप में मानी जाता है । और वह पत्थर जिस पर वह गाय दूध चढाती थी वह आज भी मंदिर के अंदर स्थापित है और तब से आज तक भक्त लोग उस पत्थर को दूध से नहलाते हैं और उसकी पूजा अर्चना करते हैं

वही नांग पंचमी पर नाग मंदिर में हजारों कि संख्या में भक्तों का ताता लगा रहा और भक्तों ने उस पत्थर में नागदेवता के दर्शन कर उस पर दूध एंव प्रसाद चढा कर पूजा अर्चना करते है और अपने परिवार में सुख शांति की कामना करते है। स्थानीय निवासी राकेश रावत ने बताया कि यह मंदिर काफी पुराना है । यहां पर मसूरी और आसपास के क्षेत्रो के कई गांव के नाग देवता को इष्ट देवता भी माने जाते है ।

उन्होने कहा कि वृंदावन में कालिया नाग और श्री कृष्ण भगवान के बीच युद्व के बाद पराजित हुए श्री कृष्ण ने नाग देवता को यमुना नदी से अपना स्थान छोडने के लिये कहा और यह माना जाता है कि कालिया नाग देवता का स्वरूप् ही मसूरी के भटटा गांव के मदिर में विराजमान है । जिसकी सदियों से लगातार भक्त लोग पूजा करते है और मनोकामना मांगते हैं।

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