कौन खा गया सरकारी राशन ? ये कैसा जीरो टॉलरेंस : ईमानदारी की नहीं कोई कद्र, भ्रष्टाचारियों को बचाने में जुटा पूरा तंत्र

कौन खा गया सरकारी राशन ? ये कैसा जीरो टॉलरेंस : ईमानदारी की नहीं कोई कद्र, भ्रष्टाचारियों को बचाने में जुटा पूरा तंत्र

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स्नेहा बमोला,देहरादून
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन का नारा कई ईमानदार और युवा अफसरों, कर्मचारियों पर भारी पड़ रहा है । मुख्यमंत्री के जीरो टॉलरेंस के नारे पर विश्वास कर कई अधिकारी और कर्मचारी जब विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर हल्ला बोल रहे हैं, तो वर्षों से बना भ्र्ष्टाचारियों का कॉकस इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। हो ये रहा है कि भ्रष्ट अफसर तो आज भी अपनी जगह जमे हुए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के नारे से प्रेरित हो हल्ला बोलने वाले कार्मिकों पर ही उनकी सत्यनिष्ठा उलटे भारी पड़ रही है।
इसका एक ताजा उदाहरण है खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग। यूं तो भ्रष्टाचार में गले गले तक डूबे इस विभाग के हालात किसी से छूपे नहीं हैं, लेकिन नवंबर माह में राजधानी में ट्रांसपोर्ट नगर स्थित खाद्यान्न गोदाम में करीब डेढ़ करोड़ रुपए मूल्य के चावल के 8500 और गेंहू के करीब ढाई हजार कट्टों के गबन के मामले ने सबको चौंका कर रख दिया। दरअसल खाद्यान्न के ये कट्टे एक रात में गायब नहीं हो गए , ये चल तो महीनों से रहा था, लेकिन मामला तब पकड़ में आया जब ट्रांसपोर्ट नगर स्थित इस गोदाम में मार्केटिंग इंस्पेक्टर रविंद्र रावत ट्रांसफर होकर आए।

इस युवा अफसर को जब यहां का चार्ज हैंडओवर किया जाने लगा, तो रावत ने पाया कि गोदाम में खाधान्न के 11 हजार कट्टे कम हैं। इस पर रावत ने गोदाम का चार्ज लेने से मना कर दिया । इसके बाद ही मामले का खुलासा हो पाया।
हालत ये है कि करीब एक माह बाद भी मामले को रफा दफा करने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं । फजीहत से बचने के लिए आरोपी केंद्र प्रभारी कैलाश चंद्र पांडेय को निलंबित तो किया गया, लेकिन अभी भी आम जनता के हिस्से के अनाज पर डाका डालने वाले सरकारी चोरों के खिलाफ कोई रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की गई ।
जीरो टॉलरेंस की सरकार और उसके कारिंदों का कमाल देखिए मामले को उजागर करने वाले ईमानदार अफसर रविन्द्र रावत को पुरस्कृति करने के बजाए उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से इसकी सजा दे दी गई।

सजा ये कि उनकी जगह अब केंद्र प्रभारी का चार्ज हरेंद्र रावत को दे दिया गया है। हरेंद्र रावत अभी तक लक्सर खाधन केंद्र के प्रभारी थे।

मंगलवार को उनकी नई तैनाती के आदेश कर दिए गए। आखिर रविन्द्र रावत को क्यों नहीं केंद्र प्रभारी बनाया गया ये बताने वाला कोई नहीं है। हमने इस सम्बंध में आयुक्त खाध्य आनंद वर्द्धन से बात करनी चाही, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

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