पुरसाडी़:याेग द्वारा बंदी स्वंय का मानसिक विकास कर सकते है, :-CDOचमाेली,

पुरसाडी़:याेग द्वारा बंदी स्वंय का मानसिक विकास कर सकते है, :-CDOचमाेली,

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संजय कुंवर चमाेली,
योग द्वारा बंदी स्वंय का मानसिक विकास कर सकते हैं एवं कारागार में निरूद्ध रहने के दौरान योग किये जाने से उनके मस्तिष्क से नकारात्मक विचार दूर हो सकते हैं। यह बात मुख्य विकास अधिकारी हंसा दत्त पाण्डे ने गुरूवार को जिला कारागार में आयोजित आठ दिवसीय शिविर के समापन अवसर पर बंदियो को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि बंदी इस शिविर के समापन उपरान्त योग कराना बंद न करें, बल्कि प्रतिदिन योग को अपने दैनिक दिनचर्या में शामिल करें। उन्होंने निरूद्ध बंदियों को योग से होने वाले स्वास्थ्य लाभ की भी जानकारी दी।
जिलाधिकारी आशीष जोशी की पहल पर जिला कारागार में निरूद्ध बंदियों के आर्ट आॅफ लिविंग के प्रिजन स्मार्ट प्रोग्राम के तहत 07 जून से 14 जून तक योग शिविर का आयोजन किया गया। आर्ट आॅफ लिंविंग के योगेश भनोट द्वारा कारागार में प्रत्येक दिन सुबह दो से ढ़ाई घण्टे बंदियों को योग सिखा गया। शिविर के समापन अवसर पर जिला जेल अधीक्षक प्रमोद कुमार ने आर्ट आॅफ लिविंग द्वारा कारागार में बंदियों को दिये गये  योग प्रशिक्षण की सराहना करते हुए बंदियों को प्रतिदिन योग किये जाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वे स्वयं को अंदर से मजबूत कर मुश्किल समय का सामना आसानी से कर सकते हैं। कहा कि जेल में कई तरह के बंदी निरूद्ध रहते है एवं जेल में रहने के दौरान उनके मन मस्तिष्क पर विपरीत प्रभाव पडता है। योग द्वारा वह स्वयं सकारात्मकता की ओर ले जा सकते हैं।

इस अवसर पर योगेश भनोट के निर्देशन में बंदियों द्वारा एक नाटक का प्रदर्शन कर जंगलों को आग से बचाने का संदेश भी दिया गया। इस अवसर पर आर्ट आॅफ लिविंग के स्वयं सेवक पे्रम कुमार विश्नोई सहित बंदी उपस्थित रहे।

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